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Web 3.0 : Door to Future

Introduction

इस ब्लॉग में हम Web 3.0 के बारे में बात करेंगे, दोस्तो तकनीकी प्रतिदिन बढ़ती जा रही है रोज अलग-अलग तरह की खोज हो रही हैं, और आप भी तकनीकी और इंटरनेट में रूचि रखते हैं तो आपको 3.0 के बारे में जरूर जानना चाहिए, शायद इस बारे में आपने सुना होगा, तो बात ऐसी है कि Web 3.0 इटरनेट की दुनियाँ को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है।

यह इंटरनेट का एक प्रकार या नया Version भी कह सकते है, इससे पहले Web 1.0 और Web 2.0 आ चुके हैं, अगर हम पहले की बात करें तो सन् 1980-90 के दशक में इंटरनेट की शरूआत हुई थी, उस समय वर्तमान के जैसे इंटरनेट नहीं था, पहले इंटरनेट बहुत लिमिटड और आसान हुआ करता था, कुछ सीमित चीजे हुआ करती थी । फिर सन् 1990 से 2004 के बीच Web 2.0  आ गया टेक्नोलॉजी थोड़ा बढ़ी ।

web3.0 gyanbooster

तो इस ब्लॉग में हम Web 3.0 और इंटरनेट की दुनियाँ के बारे में बात करने वाले हैं जिसको जानना आपके लिये अति आवश्यक हो जाता है क्योंकि आने वाला समय इंटरनेट का ही है ।

Web 3.0 इंटनरेट का भविष्य

Web 3.0 को जानने से पहले हम इंटरनेट के बारे में पूरी जानकारी लेंगे, जैसे कि पहले हम लोग बात कर चुके हैं कि इसके पहले Web1.0 और Web2.0 आ चुका है , तो पहले Web1.0 और Web2.0 के बारे में बात करेंगे, फिर उसके बाद Web 3.0 के बारे में पूरी जानकारी ।

Web 1.0

www-Word Wide Web इसको आप भाषा में ही Web वेब कहते हैं, जो एक प्रकार का वेबसाइट या वेब पेज के लिये स्टोरेज का कमा करता है जो कि इंटरनेट के माध्यम से जुड़ा होता, इस प्रकार की वेबसाइट में Text, Digital Image, Audio Files, Video files, Video इत्यादि होते हैं जिसको उपयोगकर्ता Mobile, Compute और Laptop इत्यादि से Internet के माध्य से दुनियाँ के किसी भी कोने से इन सारी चीजों तक पहुँच सकता है।

Web1.0 – www-Word Wide Web या Internet है, इसका आविष्कार सन् 1989 मे हुई थी और यह वर्ष 1993-94 तक काफी लकप्रिय रहा । Web1.0 के समय वेबसाइट स्टेटिक हुआ करती थी, Static Web site वह वेबसाइट होती है जिसमें कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता, इसमें सभी सामग्री स्थाई होती है। इसको बनना काफी सरल होता है।

Web1.0 के समय में बेवसाइट पर केबल Text ही हुआ करते थे, उस समय की वेबसाइट पर हम कुछ कमेंट भी नहीं कर सकते थे, इसमें कोई लॉगिन की प्रक्रिया भी नहीं होती थी, इस समय सोशलमिडिया वेबसाइट भी नहीं थी, इसमें काफी कमियाँ थी जिसके सुधार के लिये Web 2.0 को लाया गया ।

Web 2.0

Web2.0 सन् 1990 के शुरु हुआ था और यह 2004 तक प्रभावी रहा, Web 1.0 की तुलना में Web 2.0 अधिक विशेषताएं थी, इसमें यूजर अपनी कमेंट भी कर सकता था और वेबसाइट पर फोटो और विडियों भी आने लगी थी ।

Web 2.0 में वेबसाईट स्टेटिक ही नहीं रह गयी थी अब वेबसाइट Dynamic होने लगी थी जिसमें E-Commerce, Social Media, Blogs भी आने लगे थे जो कि Web 1.0 में नहीं था ।

यही वो सयम था जब Facebook, YouTube आया जिससे लोगों के बीच (Connectivity) जुडाव बढ़ा, यूटर इंटरेक्सन बढ़ गया ।

इसी समय Mobile Phones, Cloud Computing का प्रयोग होने लगा था । Web2.0 में हम अपना कन्टेंट भी बना सकते थे और दूसरों के कन्टेंट पर कमेंट भी कर सकते थे। फिर इसके बाद आया इंटरनेट का भविष्य जिसे Web3.0 नाम दिया गया । Web 3.0 बात करने से पहले हम बात करते हैं कि आखिर इसकी आवश्यकता क्यो पड़ी Web 3.0 की .

web 3.0 Door to Future

Web3.0 की आवश्यकता क्यों ?

दोस्तो आजकल हम सभी लोग इंटरनेट का प्रयोग कर रहे है सभी के पास मोबाईल फोन्स होगा और उसपर हमारे बहुत ही ज्यादा डॉटा होता तो कि बहुत ही महत्वपूर्ण हो सकता है तो क्या इस डॉटा को केवल एक ही के पास होना चाहिए जी नहीं इसीलिये तो Web 3.0 की आवश्यकता हुई ।

जब Web2.0 था तब इंटरनेट और इंटरनेट ट्रैफिक से सम्बन्धित डेटा का रख रखाव या कह सकते है कि डॉटा का स्वामित्व कुछ विशिष्ट कम्पनियों के पास ही हुआ करता था जैसे कि Google । एक कारण यह भी है Web 3.0  के आने का।

Web 2.0 में डेटा की सुरक्षा उतनी अच्छी नहीं थी, डेटा की गोपनीयता भी नहीं थी जिस कारण डॉटा को दुरूपयोग सम्बन्धी समस्याओं को सामना करना पड़ता था । इसी लिये Web 3.0 की आवश्यकता थी ।

Web 3.0 क्या है?

Web 3.0 में डेटा को संवादात्मक रूप (conversational form) से जोड़ने की क्षमता होती है, जिससे यूजर को सही और व्यापक जानकारी का अनुभव होता है, इसमें यूजर अपने डेटा नियंत्रण स्वयं कर सकता है जो कि सही भी है क्योंकि आज के समय में हम सभी अपने सभी महत्वपूर्ण डेटा को इंटरनेट पर रखते हैं तो अगर हमी इसका पूरा नियंत्रण रखें तो कितनी अच्छी बात होगी जिससे हमारे डेटा का दुरपयोग नहीं हो पायेग ।

Web 3.0 में ऐसी वेबसाइट हैं जो की Machine Learning, Artificial Intelligence और Blockchain की Technology पर काम करेंगी ।

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Web 3.0 www या वेब का तीसरा संस्करण है जो कि Blockchain और Artificial Intelligence की मदद से इंटरनेट को और बी ज्यादा आसान बना दिया है जो कि एक विकेंद्रीकरण (Decentralized) होगा जिसमें किसी एक विशिष्ट कम्पनी का स्वामित्व नहीं होगा इससे डॉटा सुरक्षा सही से होगी । और सबसे बड़ी बात यह है कि इसको हैक करना लगभग नामुमकिन है ।

तो दोस्तो उम्मीत करते हैं कि इस पोस्ट से आपको Web 3.0 के बारे में पूरी जानकारी मिल गई होगी बाकी कोई सुझाव या सवाल हो तो आप कमेंट करके बता सकते हैं।


FAQ-

Q1- WWW क्या है?

यह एक विशेष प्रकार का इंटरनेट Address है जो Websites की पहचान के लिए प्रयोग होता है। जब आप इंटरनेट ब्राउज़र जैसे Google Chrome, Mozilla Firefox में किसी भी वेबसाइट का एड्रेस बार में www को टाइप करते हैं, तो आप उस वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ (home page) तक पहुँचते हैं।

Q2- Internet क्या है?

Internet एक विस्वस्तरीय सार्वजनिक नेटवर्क है जो कि कम्पयूटर नेटवर्क का एक समूह होता है, जिसमें अलग-अलग तरह के इलेक्ट्रानिक डिवाईस जैसे सर्वर, स्विच, राउटर इत्यादि उपकरण एक दुसरे से जुडे होते हैं जिससे कहीं भी बैठकर किसी भी जगह की जानकारी हासिल की जा सकती है।

Q3- Artificial Intelligence क्या है?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मानव द्वारा निर्मित कृतिम दिमाग होता है, इसके सहायता से कम्यूटर सिस्टम या रोबोट को निर्मित किया जाता है जिसके सोचने समझने की क्षमता मनुष्य के दिमाग की तरह ही होती है,ये मुख्य रूप से मानव मस्तिष्क के आधार पर ही कार्य करता है,

Q4- WWW का Full Form?

World Wide Web

Q5 Internet को खोज कब हुई?

इंटरनेट की शुरुआत की गई और उसे अमेरिका के रक्षा मंत्रालय के Advanced Research Projects Agency (ARPA) के अंतर्गत ARPANET के रूप में जाना जाता है। ARPANET को 29 अक्टूबर 1969 को आरंभ किया गया था, और इसी से इंटरनेट की शुरुआत हुई।

इसके बाद, इंटरनेट का विकास बड़ी तेजी से हुआ और वर्तमान में अब यह सभी के लिये एक बेसिक जरूरत जैसा हो गया है।


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2 thoughts on “Web 3.0 : Door to Future”

  1. Sujeet the rock

    Can we make a program in web 3.0 by using artificial intelligence or can use web 3.0 in artificial intelligence…????

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