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A monk who sold his Ferrari review in Hindi

 Summary in Hindi || एक संन्यासी जिसने अपनी फरारी बेच दी ।

 

A monk who sold his Ferrari review in Hindi- एक संन्यासी जिसने अपनी फरारी बेच दी यह किताब केवल किताब मात्र ही नहीं है यह वह हथियार है जो आपके जीवन को एक नई दिशा दे सकता है, यह किताब एक यात्रा है जो हमें अपने जीवन को बेहतर बनाने में एक नई दिशा की महत्पूर्णता को समझाती है । यह किताब वर्तमान समय में आने वाली तमात तरह की समस्याओं को सुलझाने का आईना है । यह किताब पूर्ण लॉयर जुलियर मेंटले की कहानी के माध्यम से एक खुशहाल और संतोषमय जीवन जीने का तरीका सिखाती है , इस किताब के अध्ययन मात्र से ही आप आत्मज्ञान से भर जायेंगे, इसमें सपनों को पूरा करने की अद्भुत कथा है ।

About Author (लेखक के बारे में)

 

“A monk who sold his Ferrari “ यह किताब रॉबिन शर्मा द्वारा लिखी गई है जो एक विश्वस्तरीय गैर लाभकारी उपक्रम के संस्थापक है जो मानव को बेहतर और खुशहान जीवन जीने में मदद करती है । रॉबिन शर्मा अपने व्याख्यानों और किताबों के मध्यम से लोगों को उत्साहित और उनकी क्षमता का एहसास कराते हैं कि मानव के अन्दर कितनी सारी एनर्जी है कि मानव जो चाहे वह कर सकता है । रॉबिन शर्मा भारतीय मूल के हैं परन्तु रॉबिन शर्मा का जन्म 18 मार्च, 1965 को कनाडा में हुआ था, रॉबिन शर्मा पेशे से एक वकील थे परन्तु इसमें उनकी सन्तुष्टि नहीं मिल रही थी इसलिये इन्होंने 25 वर्ष की उम्र में लेखन प्रारम्भ कर दिया था । इनके द्वारा लगभग 15 किताबे लिखी जा चुकी है जिनमें से एक संन्यासी जिसने अपनी फरारी बेच दी (A Monk Who Sold his Ferrari) सबसे ज्यादा बिकने वाली किताब है जो उनके उनके द्वारा लिखी गयी दूसरे नम्बर की किताब है और ये सबसे ज्यादा पढ़ी भी जा रही है , एक संन्यासी जिसने अपनी फरारी बेच दी इसी किताब की सफलता के बाद रॉबिन शर्मा नें अपना वकील वाला कैरियर छोड़ दिया ।

A Monk Who Sold his Ferrari review in hindi

रॉबिन शर्मा द्वारा लिखी गई फेमस किताबों के नाम –

 

  • मेगालिविंग- 30 डेज़ टू ए परफेक्ट लाइफ (Mega Living)
  • द मॉन्क हू सोल्ड हिज़ फेरारी (A Monk Who sold his Ferrari)
  • जब आप मरेंगे तो कौन रोएगा (Who Will Cry When You Die)
  • महानता मार्गदर्शिका (The Greatness Guide)
  • वह नेता जिसके पास कोई उपाधि नहीं थी ( The leader who had no title)
  • द 5 एएम क्लब ( The 5 Am. Club)
  • द एवरीडे हीरो मेनिफेस्टो (The Every Day Hero Manifesto)

A Monk who sold his Ferrari Book Review

अगर आपके दुनियाँ भर की सुख सुविधायें है परन्तु आपको आन्तरिक शान्ति नहीं मिल रही है तो यह किताब आपके लिये काफी मददगार साबित हो सकती है , ये किताब सभी को पढ़नी चाहिए क्योंकि इसमे ऐसी-ऐसी चीजों के बारे में बताया गया है कि हर एक मानव के जीवन में ये सारे बाते जरूर आती है तो इस किताब को आप अवश्य पढ़े ।

मनुष्य अपने जीवन में बहुत सारी सुख- सुविधा और धन तो इकट्ठा कर लेता है परन्तु शांति को प्राप्त नहीं कर पाता ऐसा एक नहीं लगभग हर मानव के पास ऐसी समस्या प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है, इस बदले परिवेश में मनुष्य का जीवन कॉफी भाग-दोड़ वाला हो गया है, हर कोई अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिये भाग रहा है, हर एक पैसा कमाने के लिए भाग रहा है, कोई कही तो कोई कहीं परन्तु मनुष्य अपने मूल उद्धेश्य को ही भूल जा रहा है यही कारण है कि किसी को शान्ति का सुख नहीं मिल रहा है ।लेखक रॉविन शर्मा अपने इस किताब- A Monk who sold his Ferrari के माध्यम से हर इंसान को उसके मूल उद्देश्य के करीब ले जाने में कॉफी मदद कर रहे हैं और उससे पूरा करने में आने वाली विकट परिस्थिति के निकलने के बारे में भी बताते है ।

A monk who sold his Ferrari review in Hindi

A Monk who sold his Ferrari किताब लेखक रॉविन शार्मा द्वारा अंग्रेजी में लिखी गई थी उसके बाद इसका हिन्दी में अनुवाद डॉ.राजीव शर्मा और श्रीमती राजेश शर्मा ने मिलकर किया ।

शुरूआत कठिन होता है

जूलियन मेंटल एक महान वकील था, वह एक आलीशान जीवन को जी रहा होता है, उसके पास बंगला,गाड़ी सहित दुनियां की सारी सुख सुविधाये वाली सारी चीजों का स्वामी होता है । उसके पास सारी भौतिक सुख-सुविधा होती है परन्तु उसका जीवन सुकून और शांन्ति से पूरी तरह खाली होता है, उसको आन्तरिक सुख बिल्कुल नहीं होता है। कुछ समय बाद जूलियन मेंटल को दिल का दौरा पड़ता है और वह हॉस्पिटल में भर्ती हो जाता है और वहाँ पे उसे पता चलता है कि उसको अपने काम और जीवन में से एक को चुनना पडेगा क्योंकि अगर मेंटल ऐसे ही काम करता रहा तो वह अपना बहुमुल्य जीवन खो देगा । हॉस्पिटल में डॉ. के द्वारा ऐसा कहने के बाद मेंटल सोच में पड़ जाता है और निर्णय लेता है कि वह अपनी सारी संपत्ति को बेच देगा और यह करना कॉफी कठिन होता है लेकिन अगर बाद जीवन की हो तो क्यो नहीं इसलिये जूलियन मेंटल अपनी सारी सम्पत्ति बेचकर भारत चला आता है ।

भारत में ज्ञान की प्राप्ति

जूलियन मेंटल अपनी सारी सम्पत्ति बेचकर सुख और शान्ति पाने के लिये भारत की शैर पर निकल पड़ते हैं, भारत में आने के बाद मेंटल को हिमालय पे रहने वाले सिवाना के ऋषियों के बारे में पता चलता है और यह भी पता चलता है कि यहाँ के ऋषि 100 से भी अधिक वर्षों तक स्वश्थ्य तरीके से जीते हैं । फिर क्या मेंटल सिवाना के ऋषियों से मिलने निकल पडता है पहुँचने तक का सफर किताब में पढ़ने से आपको रोमांचित कर देगी । तो सिवाना के ऋषियों ने जुनियल मेंटल को जीवन के कुछ खास रहस्यों के बारे में बताते हैं।

व्यक्तिगत परिवर्तन का ज्ञान

A Monk who sold his Ferrari-मैं जीवन जीने की कला में निपुण हू- मेरे काम करने की कला ही मेरा जीवन है –सुजुकी

a monk who sold his ferrari in hindi

भारत आकर जूलियन मेंटल का पूरी तरह व्यक्तिगत परिवर्तन हो जाता है उसने उन प्राचीन तकनीकों के बारे में सीखा जो मानसिक नियंत्रण और चिंता करने की आदत को समाप्त कर देती है जिससे वर्तमान में हमारे समाज में अधिकतर लोग पीड़ित हैं । हमारे अन्दर यौवन और उर्जा का स्त्रोत होता है जिसे जगाना पड़ता है जिसको जगाने के कई तरीके जूलियन मेंटल योगी रमन और दूसरे संतो से सिखकर आया था ।

एक अत्यन्त असाधारण बगीचा

मस्तिष्क-बगीचा मस्तिष्क का प्रतीक है यह हम अपने मस्तिष्क की देखभाल करेंगे, इसे पोषण देगें, उसे उपजाऊ और सम्पन्न बगीचे की तरह सीचेंगे तो यह हमारी आशाओं से भी अधिक विकसित होगा । अगर इसमें जंगली घास जमने दोगे तो यह मन की अनन्त शान्ति और आंतरिक एकात्मता को  तुमसे दूर भगाता रहेगा ।

जीवन को पूर्णतया से जीने के लिये हमें अपने मन रूपी बगीचे के द्वार पर पहरा देना होगा सिर्फ अच्छी सूचनाओं को ही अन्दर जाने देना चाहिए , एक भी नकारात्मक विचार को अपने अन्दर नहीं आने देना चाहिए ।

जो व्यक्ति अपनी मानवीय क्षमता को बहुत अधिक बढ़ा लेते हैं और वास्तव में जीवन के जादूई नृत्य का रसास्वादन करते हैं ।

“मस्तिष्क का सही संचालन ही जीवन संचालन का सार है”

स्वःनेतृत्व की प्राचीन कला

अपना नवीनीकरण करने के लिये समय निकालना सर्वोत्तम कार्य है जो हम कर सकते हैं, अपनी अत्यन्त व्यस्त दिनचर्या में से आत्म-सुधार और व्यक्तिगत समृद्धि के लिए समय निकालने से हमारी कार्य करने की क्षमता में बहुत बड़ा सुधार हो सकता है ।

अनुशासन की शक्ति

जब मकड़ी के जाले इकट्ठे हो जायें तब एक शेर को बाध सकते हैं, जब तुम अपनी इच्छा शक्ति को आजाद करते हो तो तुम अपनी दुनियाँ के मालिक बन जाते हो जब तुम स्व-शासन की प्राचीन कला का निरन्तर अभ्यास करते हो तो तुम्हारे लिये कोई बाधा पार करना पड़ी बात नहीं होती है .कोई भी संकट इतना भयानक नहीं होगा कि तुम ठंण्डे दिमाग से बर्दास्त न कर सकों । तुम्हें पता होना चाहिए कि इच्छा शक्ति की कमी होना एक मानशिक बीमारी है । तुम्हारी इच्छा शक्ति तुम्हें वह सब कुछ दिला सकती है जिसे तुम पाना चाहते हो तो इस किताब में इच्छा शक्ति के बारे में काफी अच्छे तरीके से बताया गया है जिसके बारे में पढ़ के आप को एक अलग अनुभव होगा ।

आपकी सबसे बहुमूल्य वस्तु

आपका सबसे बहूमूल्य वस्तु केवल एक ही है वह है समय, अपने समय की कद्र करो, समय तुम्हारी सबसे कीमती वस्तु है, और यह पुनः वापस नहीं आऐगा, अपनी प्रमुखतायों पर ध्यान दो और सन्तुलन बनाये रखों,अपने जीवन में सादगी लाओ ।

  • समय हमारे हाथों से रेत के कणों की तरह फिसल जाता है, कभी न फिर वापस आने के लिये ।

जो व्यक्ति प्रारम्भ से समय का उपयोग बुद्धिमानीपूर्वक करते हैं, उन्हें प्रतिफल स्वरूप समृद्ध, उत्तपाद और सन्तोषप्रद जीवन प्राप्त होता है ।

  • सुनियोजित समय सुनियोजित मस्तिष्क का प्रतीक है ।- सर ईजाक पिटमैन

 

तो हमारा सबसे बहुमूल्य वस्तु है वो है हमारा समय इससे किमती कोई वस्तु नहीं है ।

तो दोस्तों इस पोस्ट में हमने A Monk who sold his Ferrari – एक संन्यासी जिसने अपनी फरारी बेच दी के बारे में छोटे सा परिचय दिया है इस किताब का एक छोटा सा रिव्यू है जो आपको पसन्द आया होगा दोस्तो इस तरह के पोस्ट हमारे साईट पे आपको हमेशा मिलती रहेगी तो आप अपना सुझाव जरूर देना जिससे की अगर कोई कई रह गयी हो तो इसको पूरा कर सके और पोस्ट पसन्द आई हो तो अपने दोस्तो को जरूर शेयर करियेगा ।

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2 thoughts on “A monk who sold his Ferrari review in Hindi”

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